Year: 2015
पुर्जा-पुर्जा कट मरे, कबहूं न छाड़े खेत!
करीब तीन हफ्ते पहले की बात है जब दिल्ली की चुनावी सरगर्मी के बीच एक स्टोरी के सिलसिले में हम...
किरण का विकिरण कोई नई बात नहीं
उनको बचपन से ऐसा ही देखा है. सुबह की शाखा के बाद दर-दर पर्चे बांटते. स्वदेशी का नारा लगाते. गीत...
जलते जलगांव के बीच विलास सोनवणे को दिल्ली में सुनना
क्या आप विलास सोनवणे को जानते हैं? कल दिल्ली में उनका एक व्याख्यान था। विषय था ''धर्मांतरण की राजनीति''। विलास...
पेरूमल मुरुगन और वन पार्ट वुमन: प्रणय कृष्ण
मुरुगन ने किसी प्रथा पर कोई मूल्य निर्णय नहीं दिया है, अच्छा या बुरा नहीं कहा है, उन्होंने सिर्फ एक...
कविताः असहिष्णु
और अब असहिष्णु हो चला हूं मैं उन सबसे जिन्होंने मुझे बताया है कि ख़तरे में क्या है ठेस किसे...
