एक लेखक की खुदकुशी और सन्नाटा

आज, जब एक लेखक मरा है, एक बुजुर्गवार ने खुदकुशी की है, हम तक सबसे पहले बस्तर को पहुंचाने वाले शख्स' ने मौत के रूप में एक बार फिर गुमनामी को चुना

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मेरे लेखकों! तुम्हें इंतज़ार किसका है और कब तक?

लोगों के संघर्षों को महज़ अपनी कहानियों और कविताओं में जगह देने से बात नहीं बनने वाली, न ही आपका पुरस्‍कार लौटाना जनता की अभिव्‍यक्ति की आज़ादी

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सिंगरौली: इंसान और ईमान का नरक कुंड-1

जहां छह दशक से विकास के नाम पर विदेशी पैसे से सिर्फ विनाशलीला को सरकारें अंजाम दे रही हों, वहां विकास के इस विनाशक मॉडल के खिलाफ बोलने वाला कोई

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आस्‍था नहीं, अन्‍वेषण पर आधारित हो इतिहास

भारतीय इतिहासलेखन के विकास, असहमति की परंपरा तथा बौद्धिक अभिव्‍यक्तियों को बाधित करने के मौजूदा प्रयासों पर रोमिला थापर की कुलदीप कुमार से

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