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राजस्थानः बिजली संबंधी मुद्दों पर जनसुनवाई

Nov 3, 2011 | Pratirodh Bureau

राजस्थान के राजसमंद ज़िले की भीम तहसील मुख्यालय पर गुरुवार को बिजली विभाग से जुड़े मुद्दों पर जनसुनवाई का आयोजन किया गया. इस आयोजन में जिला कलेक्टर, बिजली विभाग के अधिशाषी अभियंता और अन्य अधिकारियों कर्मचारियों ने हिस्सा लिया.

 
जनसुनवाई में बिजली की आपूर्ति से लेकर मीटर की गड़बड़ियों, कई महीनों से बिलों के न आने की समस्या, नया कनेक्शन लेने की स्थिति में विभाग द्वारा पूरी सामग्री न उपलब्ध कराया, निजी क्षेत्र की कंपनियों का बढ़ता एकाधिकार और सरकारी विभाग से उनकी मिलीभगत जैसे मामले सामने आए और उनपर लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी.
 
लोगों ने बताया कि बिजली की आपूर्ति का समय और मात्रा तो एक बड़ा सवाल है ही, पर चयनित परिवारों के लिए इससे भी बड़ा संकट इस बात को लेकर है कि उनके घरों में जो बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, उसके बिल महीनों से नहीं आए हैं. क्षेत्र के 10 परिवारों ने आकर अधिकारियों के समक्ष अपने बयान में बताया कि पिछले दो-तीन साल से एक भी बिल उन्हें नहीं भेजा गया है जबकि वो चाहते हैं कि उनको समय पर बिजली का बिल भेजा जाए ताकि भुगतान सीमित हो और समय पर हो सके.
 
टोगी टिबाला गांव की चयनित परिवार की सक्कू बाई ने कहा कि पिछले दो साल से उसके घर बिजली तो आती है पर एक भी बिल नहीं आया है. ऐसे में अगर अब इकट्ठा बिल आता है तो वो उसका भुगतान कैसे करेगी.  
 
दरअसल, चयनित परिवारों के लोगों की चिंता इसलिए भी गंभीर है क्योंकि तीन साल की अवधि के दौरान इस्तेमाल की गई बिजली का बिल अगर एकसाथ आता है तो वो हज़ारों में होगा और इसका भुगतान कर पाने उनके लिए संभव नहीं हो सकेगा. ऐसे में विभाग की ओर से होने वाली कुर्की जैसी कार्रवाइयों का कष्ट बेवजह ही उनको झेलना पड़ सकता है. फिर, इस स्थिति के पैदा होने के लिए विभाग की लापरवाही कारण है न कि लोगों द्वारा बिलों का भुगतान न करना.
 
40 लाख का सीएफएल घोटाला
 
राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत चयनित परिवारों को जो बिजली कनेक्शन दिए जाने होते हैं, उसमें तमाम सामग्री, जैसे खंभा, मीटर, सीएफएल, रॉड, अर्थ वायर, सर्विस लाइन निःशुल्क दिए जाते हैं पर जनसुनवाई में आए कई परिवारों ने बताया कि उनसे इस सामग्री के लिए 1500 रूपए से लेकर सात हज़ार रूपए तक वसूले गए हैं. 
 
जनसुनवाई में आया एक भी परिवार ऐसा नहीं था जिसे सीएफएल बल्ब बिजली विभाग द्वारा उपलब्ध कराया गया हो. 
 
ऐसे में, राजसमंद ज़िले के जिन 44,000 परिवारों को राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत कनेक्शन दिए गए हैं, उनके इन बयानों को ध्यान में रखकर देखें तो लगभग 40 लाख रूपए का घोटाला उजागर होता है.
 
कई परिवारों ने शिकायत की कि उनके घरों में विद्युत आपूर्ति नहीं हो रही है, फिर भी उन्हें बिल भेजे जा रहे हैं. करगिल में मारे गए सैनिक देवी सिंह की विधवा, लक्ष्मी देवी ने बताया कि वो पिछले कई महीनों से विभाग के चक्कर काट रही हैं पर उन्हें बिजली कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है.
 
बिजली की असमय कटौती पर भी लोगों ने गहरा रोष व्यक्त किया और इस मुद्दे पर लोगों की स्थानीय अधिकारियों के साथ तीखी नोक-झोंक भी हुई.
 
निजी क्षेत्र की तानाशाही
 
विभाग द्वारा जो काम कराया जा रहा है, उसमें गांधीनगर, गुजरात की निजी कंपनी कल्पतरु पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड को ही ठेके प्राप्त हुए हैं. 
 
इस कंपनी ने जो काम किया है वो बहुत ही असंतोषजनक है और उसमें गुणवत्ता के सभी मानकों की धज्जियां उड़ाई गई हैं. इससे स्थानीय लोग बहुत आक्रोशित हैं और उन्होंने बिजली विभाग के आला अधिकारियों से इसकी शिकायत करते हुए कहा कि इस कंपनी के खराब प्रदर्शन को देखते हुए उसे भुगतान न किए जाएं.
 
अजमेर विद्युत वितरण निगम के सहायक अभियंता, दिनेश सिंह ने विभाग की असहाय और चिंताजनक स्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि कनेक्शनों को लेकर पैदा हुई इस खराब स्थिति के लिए कई विभागीय कारण भी ज़िम्मेदार हैं. उन्होंने बताया कि सरकारी योजना के तहत बड़े पैमाने पर कनेक्शन देते समय कई नियमों की अनदेखी हुई क्योंकि काफी काम हड़बड़ी में किया गया. कनेक्शन दिए तो गए पर विभाग के पास इसकी निगरानी, रखरखाव और पर्यवेक्षण की कोई व्यवस्था नहीं थी.
 
दिनेश सिंह ने यह भी स्वीकारा कि ठेकेदारों ने विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके सरकारी कामकाज को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाने का काम किया और इससे भी योजनाओं का सही और ईमानदार ढंग से क्रियान्वयन नहीं हो सका.
 
लेकिन आक्रोशित लोगों ने विभाग के कामकाज के तरीके की भर्त्सना करते हुए पुरज़ोर ढंग से मांग की कि कल्पतरु कंपनी का सारा भुगतान रोक दिया जाए, उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और सभी कनेक्शन आवेदकों को सीएफएल वितरित किए जाएं.
 
इस अवसर पर जनसुनवाई को संबोधित करते हुए मजदूर किसान शक्ति संगठन की अरुणा रॉय ने कहा कि ग़रीबों को मिलने वाले अधिकारों, सुविधाओं और सहूलियतों के साथ किसी भी तरह की कोताही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
 
राजसमंद ज़िले के कलेक्टर यशवंत बी प्रीतम ने जनसुनवाई में विद्युत विभाग से संबंधित शिकायतों को स्वीकार करते हुए कहा कि समस्याओं के निवारण के लिए शिकायत निवारण की एक प्रभावशाली प्रणाली बनाने की ज़रूरत है.
 
जनसुनवाई में एक हज़ार से ज़्यादा स्थानीय लोगों, कई सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं, देश-विदेश से आए सामाजिक पर्यवेक्षकों, पत्रकारों आदि ने हिस्सा लिया.  
 
जनसुनवाई में पारित प्रस्ताव
 
बिजली की समस्या पर चर्चा के अतिरिक्त इस जनसुनवाई में बुधवार को केंद्र सरकार द्वारा जनता के समक्ष प्रस्तुत किए गए शिकायत निवारण क़ानून के प्रारूप पर भी चर्चा हुई. 
 
लोगों ने प्रारुप का स्वागत करते हुए कहा कि जबतक इसमें ज़िला स्तर पर एक स्वतंत्र शिकायत निवारण प्राधिकरण और ब्लॉक स्तर पर जनता सहायता केंद्र की व्यवस्था नहीं बनाई जाती है, तबतक इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है.
 
लोगों ने कहा कि शिकायत निवारण की दिशा में सरकार ने जो कदम बढ़ाया है, वो सराहनीय है पर इसे प्रभावी बनाने के लिए कुछ सुधार बहुत ज़रूरी हैं.

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