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निसार मैं तेरी गलियों के, ऐ वतन, के जहाँ
चली है रस्म के कोई न सर उठा के चले
-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
Last Modified: 19 Apr 2012 09:10:17 PM IST

एक सफ़र- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

प्रतिरोध ब्यूरो

faiz ahmad faiz poet pakistan
पाकिस्तान के महान शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की ज़िंदगी को बताने और समझाने के उतने ही तरीके हैं जितने तरीके के लोग. फ़ैज़ क्यों, किसी की भी ज़िंदगी के लिए लोगों के चश्मे और राय अलग  अलग किस्म की होती हैं. फिर, कोई फ़ैज़ जैसा व्यक्तित्व हो तो बात ही क्या है.

ख़ैर, फ़ैज़ साहब की ज़िंदगी के कई पहलु हैं जिनमें से कुछ पर नज़र डालते हुए एक बेहतरीन काम बीबीसी उर्दू की ओर से किया गया है.

यू-ट्यूब पर अपने दोस्त शर्जील बलूच ने इसे डाला है. उन्होंने इसका काम भी किया है. शानदार फिल्मकार हैं और उतने ही शानदार इन्सान.

बाकी वक्त बेकार करने से बेहतर है कि सीधे फैज़ साहेब के इस वीडियो को देखा जाए.

वीडियो को देखने के लिए प्ले का बटन दबाएं. शुक्रिया.

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sunder batchit. shukriya

— Written by Nivedita, “about 8 months, 23 days, 22 hours, 18 minutes, 22 seconds ago

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