सीमा आज़ाद और विश्वविजय विचारशील और प्रगतिशील होने की क़ीमत चुका रहे हैं. वे कीमत चुका रहे हैं सोचने की, समझने की और सुधार लाने की कोशिशों की. उन्हें इसलिए जेल की सलाखों के पीछे बंद रखा गया है क्योंकि हम एक ऐसे लोकतंत्र में सांस लेने को विवश हैं जहाँ शोषण, उत्पीड़न और असमानता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की इजाज़त नहीं है.
(यहां छह गीतों की कड़ियों को एकसाथ पिरोकर पेश किया गया है. गीत सुनने के लिए प्लेयर चलाएं)
अगर ऐसा करने की कोई कोशिश करता है तो उसे राजद्रोही करार दिया जाता है, उसपर देश के ख़िलाफ़ युद्ध झेड़ने का अपराधी करार दिया जाता है. उसे विवश किया जाता है कि वो सत्ता की उन सभी बर्बरताओं को या तो नज़रअंदाज़ करे और या फिर ज़िंदगी जेल की सीखचों के पीछे काट दे.
ऐसे समय में, जबकि बिनायक सेन जैसे चिकित्सक और सीमा आज़ाद जैसी तेज़तर्रार पत्रकार जेल में रहे और फिलहाल जेल में हैं, इस बात का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि बाकी गरीब, पिछड़ी और ग्रामीण जनता के प्रति सरकार क्या तेवर अपना सकती है. बीजापुर की घटना को अभी बहुत दिन नहीं बीते हैं और न ही हम भूल सकते हैं कि अपनी ज़मीन को बचाने की लड़ाई लड़ रहे कुदानकुलम के लगभग सात हज़ार लोग इस तरह की धाराओं के तहत दोषी करार दिए गए हैं.
सीमा विश्वविजय की रिहाई के लिए जनसंगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, संस्कृतिकर्मियों और छात्रों का संघर्ष जारी है. इस संघर्ष में सीमा की आवाज़ में रिकॉर्ड कुछ गीत हमें प्रेरणा देने के लिए प्रस्तुत हैं.