Pratirodh.com | Putting People First
निसार मैं तेरी गलियों के, ऐ वतन, के जहाँ
चली है रस्म के कोई न सर उठा के चले
-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
Last Modified: 19 Apr 2012 07:07:53 PM IST

ऑपरेशन ब्लू स्टार और आज का पंजाब

प्रतिरोध ब्यूरो

operation blue star punjab sikh audio documentary
ऑपरेशन ब्लू स्टार पर बीबीसी हिंदी सेवा की एक विशेष रेडियो डॉक्युमैंट्री
ऑपरेशन ब्लू स्टार ने देश और पंजाब को बुरी तरह से हिलाकर रख दिया था. सवाल दोनों तरफ से थे और जवाबों की दरकार भी दोनों तरफ से. पर कई जवाब अभी भी मौन हैं.
 
विडबना यह है कि देश ने इस बड़े सवाल को अभी तक न तो गंभीरता से देखा है और न ही इसका विश्लेषण करके कुछ सीखने की कोशिश की है.
 
समाज ने कुछ सीखा है पर बहुत कुछ नहीं सीखा है. अनदेखा छोड़ दिया है. और कहानी सुलझने के बजाय कुछ उलझनों पर दस्तक देती नज़र आती है.
 
वर्ष 2009 में ब्लू स्टार के 25 बरस बाद बीबीसी हिंदी सेवा के अतुल संगर ने इस विषय पर एक विशेष रेडियो डॉक्युमैंट्री बनाई थी.
 
उसे बीबीसी हिंदी सेवा से साभार यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं.
POST YOUR COMMENTS
Your Name :
Email Adress :
Your Website :
Your Comments :
Please enter the valid code :
Code : Code
Enter Code :


आज ६ जून है ,इक इतिहासिक प्रयोग की गलती उसे सुधरने के लिए दुबारा गलती ,और अंत इंदिरा जी की ह्त्या और सीखो क नरसंहार ,भटके और बेमानी पंजाब के आतंकवाद ,निरर्थक मांग खालिस्तान की ,और अकाली दल को कमजोर करने के लिए भिंडरावाले के सर पर हाथ रखकर भस्मासुर पैदा करने की कांग्रेस या इन्दिरा गाँधी की भूल जो बाद मे ना सिर्फ पंजाब और देश के लिए नासूर बनी बल्कि अकाली और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबह्न्दक कमिटी के लिए भी नियंत्रण से निकल गयी ,खुद की सत्ता क स्वप्न देखने वाले भिंडरावाले इक विकत समस्या बनकर ,बड़ी संख्या में लड़ाके और हथियारों क जखीरा स्वर्ण मंदिर में इकठ्ठा कर चुके थे ,उस समय सिरोमणि कमिटी ,अकाली डाल,पंजाब की जनता और सरकार के खुफिया तंत्र के साथ गृह विभाग और केंद्र सरकार की काहिली,नाकामी,और अनिर्णय ने ये स्तिथि आने दी ,और उसके बाद खुद को साबित करने ,लौह महिला की छवि बनाने ,या कठोर निर्णय लेने वाली दिखने के लिए गलत सलाहकारों की सल्लाह ने इंदिरा गाँधी को उस गलती करने की ओर धकेला जिसके लिए सिखकभी उनको माफ़ नही करेंगे ,आखिर स्वर्ण मंदिर में १५ दिन या उससे अधिक की घेराबंदी काफी होती भिंडरावाले को गिरफ्तार या आत्मसमर्पण करने के लिए ,या कामांडो हेलीकाप्टर से उतरते ,लेकिन टॉप और टेंको से अकाल तख़्त पर हमला इक गलत निर्णय था ,भिंडरावाले को गिरफ्तार या खत्म करना में कोई दो मत नहीं की सही कदम था ,लेकिन तरिका गलत था ,सिर्फ घेराबंदी ही काफी थी

— Written by कल्पेश पटेल , “about 11 months, 13 days, 8 hours, 48 minutes ago

In Pictures

कुदानकुलम में पुलिस की बर्बरता

कुदानकुलम में पुलिस की बर्बरता

वॉल स्ट्रीट पर विरोध-प्रदर्शन

वॉल स्ट्रीट पर विरोध-प्रदर्शन

पाकिस्तानी संगीत बैंड लाल की दिल्ली में प्रस्तुति

दिल्ली में लाल की ललकार

Friends of Pratirodh