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आज ६ जून है ,इक इतिहासिक प्रयोग की गलती उसे सुधरने के लिए दुबारा गलती ,और अंत इंदिरा जी की ह्त्या और सीखो क नरसंहार ,भटके और बेमानी पंजाब के आतंकवाद ,निरर्थक मांग खालिस्तान की ,और अकाली दल को कमजोर करने के लिए भिंडरावाले के सर पर हाथ रखकर भस्मासुर पैदा करने की कांग्रेस या इन्दिरा गाँधी की भूल जो बाद मे ना सिर्फ पंजाब और देश के लिए नासूर बनी बल्कि अकाली और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबह्न्दक कमिटी के लिए भी नियंत्रण से निकल गयी ,खुद की सत्ता क स्वप्न देखने वाले भिंडरावाले इक विकत समस्या बनकर ,बड़ी संख्या में लड़ाके और हथियारों क जखीरा स्वर्ण मंदिर में इकठ्ठा कर चुके थे ,उस समय सिरोमणि कमिटी ,अकाली डाल,पंजाब की जनता और सरकार के खुफिया तंत्र के साथ गृह विभाग और केंद्र सरकार की काहिली,नाकामी,और अनिर्णय ने ये स्तिथि आने दी ,और उसके बाद खुद को साबित करने ,लौह महिला की छवि बनाने ,या कठोर निर्णय लेने वाली दिखने के लिए गलत सलाहकारों की सल्लाह ने इंदिरा गाँधी को उस गलती करने की ओर धकेला जिसके लिए सिखकभी उनको माफ़ नही करेंगे ,आखिर स्वर्ण मंदिर में १५ दिन या उससे अधिक की घेराबंदी काफी होती भिंडरावाले को गिरफ्तार या आत्मसमर्पण करने के लिए ,या कामांडो हेलीकाप्टर से उतरते ,लेकिन टॉप और टेंको से अकाल तख़्त पर हमला इक गलत निर्णय था ,भिंडरावाले को गिरफ्तार या खत्म करना में कोई दो मत नहीं की सही कदम था ,लेकिन तरिका गलत था ,सिर्फ घेराबंदी ही काफी थी
— Written by कल्पेश पटेल , “about 11 months, 13 days, 8 hours, 48 minutes ago ”
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