मुजफ्फरनगर हिंसा की जनुसनवाई पर रोक

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रिहाई मंच का कहना है कि मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा पीडि़तों की जनुसनवाई रोक कर सपा सरकार ने अपना मुस्लिम विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है.

जनसुनवाई रोके जाने के खिलाफ मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा पीडि़तों के साथ शहर की अमन पसन्द अवाम ने प्रदर्शन मार्च किया. सरकार द्वारा रोके जाने के बाद मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा पीडि़तों की जनुसनवाई रिहाई मंच कार्यालय पर हुई.

एक तरफ जहां धारा 144 लगे होने के बावजूद सांप्रदायिक तत्वों को खुली पंचायत करने की इजाजत दी और सांप्रदायिक हिंसा को भड़कने दिया गया. तो वहीं मानवाधिकार नेताओं और बुद्धिजीवियों व धर्मनिरपेक्ष ताकतों की तरफ से आयोजित बंद कमरे की जनसुनवाई को रोका जा रहा है.

अगर राजधानी में मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा पीडि़तों के पक्ष में अवाज उठाने पर इस तरह की पाबंदी है तो मुजफ्फरनगर में पीडि़तों की क्या स्थिति होगी समझा जा सकता है. सरकार के इस सांप्रदायिक रवैए के खिलाफ रिहाई मंच के नेतृत्व सैकड़ों की तादाद में आए मुजफ्फरनगर से सांप्रदायिक हिंसा पीडि़तों ने प्रतिरोध मार्च निकाला जो सफेद बरादरी से कैसर बाग चैराहा होते हुए विधानसभा पहुंचा जहां सभा के बाद ज्ञापन सौंपा गया.

प्रतिरोध मार्च में सांप्रदायिक हिंसा पीडि़तों ने ‘दंगाइयों को बचाने वाली सपा सरकार शर्म करो, हमारी मां-बहनों के साथ बलात्कार करना बंद करो, पीडि़तों को आश्रय देने वाले मदरसों को बदनाम करने वाले शिवपाल यादव मुर्दाबाद, दंगा पीडि़तों को आईएसआई से जोड़ने वाले राहुल गांधी शर्म करो, मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा की सीबीआई जांच कराओ, मुजफ्फरनगर दंगा पीडि़तों की आवाज दबाने वाली खुफिया एजेंसियां मुर्दाबाद’ इत्यादि नारे लगाते हुए मार्च में शामिल सैंकड़ों मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा पीडि़तों के साथ स्थानीय लोगों ने अपनी एक जुटता दिखाई.

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