क्रान्तिकारी कार्यक्रम का मसविदा

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प्रिय प्रसून जोशी जी । मैं आपको यह पत्र एक भूतपूर्व अल्मोड़ा वासी होने के नाते लिख रहा हूं ।आपको मैं अल्मोड़े का प्रतिभाशाली कलाकार समझता रहा था । अब नहीं । शक है कि तारे जमीं के गीत आपने लिखे या कहीं से …..। मोब लिंचिंग का विरोध कर रहे बुद्धिजीवियों न पी एम को एक पत्र लिखा है उसके जवाब में आप समेत फासीवाद के बचाव में एक और पत्र आप समेत कई कलाकारों द्वारा लिखा गया है ।

जब सुप्रीम कोर्ट तक केंद्र और एक दर्जन राज्य सरकारों को मॉब लिंचिंग के लिए नोटिस जारी कर रहा है ऐसे में किस तर्क के आधार पर आप मोदी के समर्थन में आए समझ से परे है । आर्थिक मजबूरी ? लगता है पैसे लेकर इस बार आपने किसी फिल्म के लिए गीत नहीं बल्कि लेख लिखा है । लेकिन दोस्त यह बहुत ही घटिया बिना तथ्यों, तर्क वाला लेख है ।

शायद आपकी पहली ओरिजिनल रचना । गंगा और महादेव जैसी कविता देने वाले और महाभारत की स्क्रिप्ट लिखने वाले राही मासूम रजा ने भी एक बार खुलेआम प्रधानमंत्री को खत लिखा था और स्वीकार किया था कि वह जीविका चलाने के लिए फिल्मों में लेखन करते हैं । माना भी था कि घटिया लेखन करता हूं । आप मानेंगे ? लेकिन ये रियल लाइफ नहीं बल्कि रियल लाइफ यानी असली जिंदगी है ? या आपके आदर्श अल्मोड़ा के बड़े भाजपाई जोशी हैं?

इतिहास की विडंबना देखिए एक तिहाई दुनिया में समाजवाद लाने वाले और 102 देशों में आजादी लाने वाली विचार धारा मार्क्सवाद के जनक कार्ल मार्क्स और एंगेल्स भी उसी देश में पैदा होते हैं जहां बाद में फासीवादी हिटलर पैदा होता है । यानी जर्मनी में । मानो प्रायश्चित हो उसी हिटलर का वध भी मार्क्स एंगेल्स के शिष्य स्टालिन के देश की रूसी सेना करती है ।
1917 की रूसी क्रांति से ही प्रेरणा पाकर ही भगत सिंह क्रांतिकारी कार्यक्रम का मसौदा लिखते हैं ।

उसी समाजवादी स्वप्न की स्थापना हेतु भारत में 1935 में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना होती है अल्मोड़े को ही यह सौभाग्य मिलता है की कामरेड पूरन चंद जोशी उसके पहले महासचिव बनते हैं । मात्र 22 वर्ष की उम्र में मेरठ षड्यंत्र केस में वह जेल में बंद होते हैं । 1907 में ही जन्मे भगत सिंह के समकालीन कामरेड जोशी 28 की उम्र में सी पी आई के महासचिव बनते हैं ।उनके नेतृत्व में पार्टी शानदार प्रगति करती है ।

उनकी पत्नी कल्पना दत्ता चिटगांव में अंग्रेजों का शस्त्रागार लूटने की साहसिक घटना को अंजाम देती हैं । इस पर एक फिल्म खेले हम जी जान से बनी है । आप अगर चाहें तो प्रायश्चित स्वरूप पी सी जोशी और कम्यूनिस्ट आंदोलन पर ( 1935 से 1947 ) फिल्म बना लें । कम से कम इतनी आशा है आप अल्मोड़े के नाम को और अधिक कलंकित ना करेंगे ।
शुभकामनाए ।

शहीद भगत सिंह द्वारा फरवरी 1931 में क्रांतिकारी कार्यक्रम का मसौदा नामक लेख।

https://www.marxists.org/hindi/bhagat-singh/1931/krantikari-karyakram.htm 

— –उमेश चंदोला , मार्क्सवादी लेनिनवादी भगतसिंह वादी

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